लखनऊ। लखनऊ क्रिश्चियन (मैथोडिस्ट) प्राइमरी स्कूल की करोड़ों रुपये मूल्य की ज़मीन को लेकर शहर में विवाद गहराता जा रहा है। कथित रूप से इस ज़मीन को लीज़ पर दिए जाने की प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे हैं, जिससे सामाजिक और शैक्षिक हलकों में हलचल मच गई है।

बताया जा रहा है कि शहर के बीचों-बीच स्थित यह ज़मीन शिक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जिस स्थान पर बच्चों के भविष्य की नींव रखी जानी चाहिए, उसी ज़मीन को लेकर कथित तौर पर बड़े स्तर पर लेन-देन और बंद कमरे में हुई प्रक्रियाओं की चर्चाएं सामने आ रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, लीज़ के नाम पर पूरी प्रक्रिया को वैध दिखाने की कोशिश की गई, जबकि अंदरखाने करोड़ों रुपये के लेन-देन की चर्चाएं भी हो रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में एक संगठित समूह (सिंडिकेट) की भूमिका रही है, जिसने इस बहुमूल्य ज़मीन को निजी हाथों में सौंपने की योजना बनाई।
इस मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं—क्या अब शिक्षा संस्थानों की ज़मीन भी प्रभावशाली लोगों के लिए खुला माध्यम बनती जा रही है? यदि स्कूलों की संपत्ति सुरक्षित नहीं है, तो आम जनता किस पर भरोसा करे?
कस्टोडियन चर्च ऑफ एसेट्स से जुड़े डॉ. राहुल उठवाल, एन.बी. मोंट्रोज़, संजोग वाल्टर, सी.आर. विलियम, धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव, अनुराग सिंह, अबुल कलाम राइन, हिमांशु कॉल, शमी मोहम्मद इरफान, जैसमिन लाल, जयवंत लाल, सुशील पॉल, राजीव कुमार, ठाकुर शिव सागर सिंह, मोहम्मद अफरीन, लोएड एडरसन, सुदीप मित्रा, उत्तम कुमार बनर्जी, सतीश चन्द्र धुलिया समेत कई लोगों ने इस कथित लीज़ का विरोध किया है।
जनता की मांग है कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही लीज़ की शर्तों को सार्वजनिक किया जाए और यह स्पष्ट किया जाए कि किन आधारों पर ज़मीन लीज़ पर दी गई। संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं से जवाबदेही तय करने की भी मांग उठ रही है।
यह मामला केवल ज़मीन तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के भरोसे और पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है।













