मिर्जापुर।
इमैनुअल चर्च, मिर्जापुर में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। चर्च से जुड़े लोगों ने लंबे समय से व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 1997 से प्रेसबिटर इंचार्ज के रूप में कार्यरत पादरी सुरेश मसीह के कार्यकाल को लेकर कई आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में चर्च संविधान के पालन में कमी और वित्तीय मामलों में पारदर्शिता के अभाव की बात कही गई है।

आरोपों के अनुसार, चर्च कमेटी के चुनाव, वार्षिक आम सभा (AGM), कोषाध्यक्ष की ऑडिट रिपोर्ट और बजट लंबे समय से सार्वजनिक नहीं किए गए। इसके अलावा विभिन्न धार्मिक अवसरों पर प्राप्त दान राशि का भी स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि सदस्यता शुल्क केवल नकद लिया जाता है और रसीद नहीं दी जाती, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बिशप मॉरिस एड्गर दान
मामले को लेकर बिशप मॉरिस एड्गर दान से हस्तक्षेप की मांग की गई है। उनसे अनुरोध किया गया है कि एक स्वतंत्र जांच समिति गठित कर मामले की जांच कराई जाए और आवश्यक कार्रवाई की जाए।
बिशप की ओर से आश्वासन दिया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित कदम उठाए जाएंगे और चर्च में पारदर्शिता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
समुदाय के लोगों का कहना है कि चर्च केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास का भी आधार है, इसलिए व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है।












